कुछ पंक्तियाँ

चलते थे जिस ज़मीं पर, संभल संभल कर हम,
सरकी वही ज़मी  नये कदम उठाने के पहले,

आसमान से तो पानी बरसता था अक्सर,
आग ही बरसी जब हम निकले  बिन तैइय्यारी के,

रौशनी रहती थी हर रोज़ ही दिन मे,
ग्रहण ही लगा सूरज को जब  हम दिन मे निकले,

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तेरे इंतज़ार मे…

हम तेरे इंतज़ार के आदि है,
ये जानकार तुम,
ना जाने कब तक इंतज़ार कारवाओगे?
इस इंतज़ार मे ही जीना है,
किस्मत हमारी.
ये मानकर तुम,
ता उम्र हमको सताओगे,
अब नही है शिकवा,
इस इंतज़ार से,
के जीना खुशी से है,
तेरे इंतज़ार मे…

 

चाहे जले हमारा जहाँ

चाहे जले हमारा जहाँ,
रौशन रहे उनका जहाँ,
जहाँ रहे चाहत हमारी…
न आए उन पर,
कोई भी आँच, जहां की…
वो खुश रहे, अपने साथी संग,
पीड मिले, हमे उनकी सारी…
खुश रहूं, तुम्हे खुश देखकर,
ये दुआ है हमारी…

जलूंगी मगर , उसकी किस्मत से  बहुत,
जो रहेगी, हमारी अधूरी किस्मत, के संग…

आह भर, रो कर भी, हम तुम्हे खुशियों की दुआए देते है…
क्योंकि… तेरी खुशियों से ही है, दुनिया हमारी…

( तूफ़ानों से लड़ने वाले )

तूफ़ानों से लड़ने वाले,
हवा के झोको से नही डरते…

इन्सान को तलाशने वाले,
परछाईयों के पीछे, भगा नही करते…

यादें जब हो  हावी जाए, आज पर,
उन यादों को जीवन मे, लाया नही करते…

जो तुम तक  आने की, न चाह रखे,
उस तक जाकर, अपने को सताया नही करते…

जो खुद को न पहचान सके,
उसके पीछे अपनी, पहचान  छुपाया नही करते…

तूफ़ानों से लड़ने वाले,
हवा के झोको से नही डरते…

~ मैं नदी थी ~

मैं नदी थी
प्यासी सी
तुम सागर से
मिलने चली थी

मिलकर सागर मे ये जाना

मैं ही अकेली, प्यासी नही थी
सागर तुम भी तो, कुछ प्यासे थे

विशाल हृदय के तुम स्वामी
कुछ तो तुम भी खाली थे

मिलती हो मुझ जैसी
सौ नदियाँ तुमसे, पर
मेरी भी प्रतीक्षा, करते थे

शांत-गंभीर और परिपक्व
तुम सदा ही दिखाते थे

कितने चंचल-कोमल
तन-मन के हो स्वामी

मिलकर तुम सागर मे, ये जाना

अथाह जल तुम्हारे अंदर
अपर सीमा के तुम स्वामी

तुम भी थे, कुछ प्यासे-प्यासे
राह मेरी भी, ताकते थे

मीठे-सादे और निर्मल जल की
चाह तुम्हे भी रहती थी

मिलकर तुम सागर मे ये जाना

तुममे मिलती हों
कयी नदियाँ मुझ जैसी
पर प्यास तुम्हारी भी
बुझती नही थी

तुम संग मिलकर
अपने रूप को खोती
तुम्हारा खारापन भी अपनाती

अपनी प्यास बुझाने
तुम्हे मीठी कर जाने

तृप्ति देने और पाने ख़ातिर
हर बार तुमसे ही, मिलने आती हूँ

तुम्हारा खारा ही स्वाद सही
पर तुममे ही तृष्णा पति हूँ