अब

1) पहले :-
बिन दस्तक, बिन आहट के,
तुम मेरे दिल तक आए,
कुछ यूँ समाए की,
दूजी, सारी दस्तकें, सारी आहटें,
मुझसे कोसों परें हो गयीं…

2) कुछ दिन पहले तक :-
बिन दस्तक, बिन आहट के,
मुझसे दूर हुए, दूर भी इतने की,
दूजी, हर दस्तक, हर आहट,
मेरे कानों मे गूंजा करती,
तुम्हारी दस्तक, तुम्हारी आहट नही,
ये कहा करती थी….

3) अब:-
ना दस्तक, ना आहट है,
ना दरवाज़े पर नज़रे टिकी है,
ना किसी आवाज़ की पुकार है,

सच्चाई मे जीना,

रिश्ता चुना था मैने,
एक तेरा ही,
इस दुनिया मे,
अब उससे भी दूर होने का इरादा,
तुमने जो जाता दिया,
अच्छा है हमने भी,
यकीन करने मे,
समय ज़्यादा,
न गंवारा किया,
जो जीना है ता उम्र,
हमे यूँ ही,
सच्चाई मे जीना,
तुमने जल्द ही,
हमे सीखा दिया…