( तूफ़ानों से लड़ने वाले )

तूफ़ानों से लड़ने वाले,
हवा के झोको से नही डरते…

इन्सान को तलाशने वाले,
परछाईयों के पीछे, भगा नही करते…

यादें जब हो  हावी जाए, आज पर,
उन यादों को जीवन मे, लाया नही करते…

जो तुम तक  आने की, न चाह रखे,
उस तक जाकर, अपने को सताया नही करते…

जो खुद को न पहचान सके,
उसके पीछे अपनी, पहचान  छुपाया नही करते…

तूफ़ानों से लड़ने वाले,
हवा के झोको से नही डरते…

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आज फिर मन उदास है,

आज फिर मन उदास है,
कोई अपना नही पास है…

              चल रही हूँ जिन रहो मे,
              कभी फूल है कभी काँटे है…

काँटों से दामन छलनि हो जाए,
पर फूलों की मुझे आस है…

              रात के आँधियारों से डर क्या मुझे, 
              धूप की तपन की आदत है मुझे…
 
बारीशों मे भी जिसने जलना सीखा,
तूफ़ानों से उसे कुछ आस है…

             परयों से डर क्या मुझे,
             डर  तो अपने आप से है..