संघर्षों का जीवन ये उस दिन पूरा हो जाएगा

नन्ही, कोमल सी, पंख पसारे,
उड़ती थी  स्वछ्न्द गगन मे,

हवाए ठंडी लगती थी,
नील गगन दिखता था,

ना कोई डर, ना जीझक,
सब कुछ सुनहरा दिखता था,

सपने सजाने की ललक,
हार को जीतने का जुनून,
लगता था सब कुछ जीत लेगी…

समय ने करवट ली है…

रोज़ आकर लड़ती है,
वो अपने ही वज़ूद से,

ना जाने खुद से ख़फा है,
या दुनिया से,

टकराती है एक दर्पण से,
जो उसका चेहरा दिखता है,
संघर्षों से लड़ लड़ कर कठोर हो चुकी है…

माथे की लकीरें मुश्किल भारी राहें  बताती है,
चेहरे  की रूढ़ता अपनी ही कहानी कहती है,

ना जाने कब तक यूँ लड़ना ही होगा?
ना जाने कब तक अपने चेहरे को ना पहचानना होगा?

संघर्षों को ही जीवन कहते है अगर,
तो ये जीवन यूँ ही, लड़ कर जीना होगा…

संघर्षों का जीवन ये, उस दिन पूरा हो जाएगा,
जिस दिन दर्पण टूट जाएगा या,
उसका वज़ूद मिट जाएगा….

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मारना नही, जीना सिखाया है…

 

तुमसे जो जाना है , हमने वो माना है….

तुम वो हो जिसने सुनना नही, समझना सिखाया है…
तुम वो हो जिसने देखना नही, महसूस करना सिखाया है…

तुम वो हो जिसने डरना नही, लड़ना सिखाया है…
तुम वो हो जिसने खोना नही ,पाना सिखाया है…

तुम वो हो  जिसने  हारना नही , जीतना सिखाया है…
तुम वो हो जिसने भूलना नही, याद रखना सिखाया है…

तुम वो हो जिसने रोते को , हॅसना सिखाया है…
तुम वो हो जिसने भटके को , रास्ता दिखाया है…

तुमसे जो जाना है , हमने वो  माना है….

तुम वो हो जिसने भवँर मे डूबना नही, तैरना सिखाया है…
तुम वो हो जिसने खुद को मिटाना नही , पाना सिखाया है…

तुम वो हो जिसने धूप मे भी , तपन को सहना सिखाया है…
तुम वो हो जिसने काँटों मे भी , चलना सिखाया है…

तुम वो हो जिसने अंधेरों को भी, रौशन करना सिखाया है…
तुम वो हो जिसने तूफ़ानो को भी, बेबस करना सिखाया  है…

तुम वो हो जिसने बुझती लौ को भी, जलना सिखाया है…
तुम वो हो जिसने मारना नही, जीना सिखाया है…

तुमसे जो जाना है , हमने वो माना है….