श्वेत मखमली चादर मे…

फैली-पसरी, श्वेत मखमली चादर मे,
एक ही रंग दिखता है,
श्वेत-श्याम एक-दूजे संग,
देखो कितना जचता है…

एक रंग मुझे, बंद आँखों से भी,
स्पष्ट दिखता जाता है,
सारे रंगों को जो,
फीका करता जाता है,

जब सुर्ख लाल रंग,
तुम्हारे प्यार का,
श्वेत मखमली चादर मे,
फैला-बिखरा सजता है…

श्वेत-श्याम एक ही, होकर…
सुर्ख लाल मे, छिपता है…
फैली-पसरी, श्वेत मखमली चादर मे…
एक ही सिंदूरी रंग दिखता है…

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