पुनी पुनी चंदन पुनी पुनी पानी…

पुनी पुनी चंदन पुनी पुनी पानी….

अपनी सहेली के ग्रहप्रवेश के फोटो देखने के बाद.आज बचपन की एक कहानी याद आ गयी.

एक गुरुजी होते है, उनके शिष्य बहुत मूर्ख और आलसी होते है.
गुरु जी को एक समय, बहुत आवशयक काम से, दूसरे शहर जाना होता है.
अपने सबसे मूर्ख और आलसी चेले को, वो एक काम सौपकर जाते है.
ये सोचकर की इस काम को करने से, चेला कुछ सीखेगा और कम आलसी बनेगा.
सुबह ४ बजे से जागकर, शालिग्राम जी (काले वाले शंकर जी), को नहलाना है,
हर बार नहलाने के बाद चंदन लगाना है,
कुछ खास मन्त्र याद करके, उनकी पूजा करनी है, और भी बहुत कुछ.
चेला तो चेला… कुछ भी नही किया…
जिस दिन गुरु जी आने वाले थे, उस दिन भाग कर नदी गया,
ताकि भगवान को नया चंदन लगा सके, नदी मे शालिग्राम जी बह गये.
चेला तो चेला… बहुत सोचा क्या कर, क्या उत्तर दे, गुरु जी को?
रास्ते मे उसे एक जामुन का पेड़ मिला, उसमे से एक जामुन गिरा,
शिष्य को रास्ता मिल गया…
जब गुरु जी आए, उन्होने शालिग्राम जी को छूकर देखा, तो पूछा,
शालिग्राम जी ऐसे, पिलपिले( चिपचिपे) कैसे हो गये?
शिष्य बोला, आपने ही कई बार भगवान नहलाने और चन्दान लगाने कहा था,
पुनी पुनी चंदन, पुनी पुनी पानी, शंकर सड़ गये हम क्या जानी?????
(अब , बार बार ऐसा करने से शंकर जी “सड़” गये और पिलपिले हो गये… तो मैं कैसे जानूं?)
हा हा हा…
कहानी की शिक्षा बहुत सारी है… तुम खुद सोच सकते हो, अगर चेले सा दिमाग़ नही होगा तो…

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Published in: on मार्च 25, 2010 at 9:49 पूर्वाह्न  Comments (1)  

One Comment

  1. The moral of the story is “जामुन एक उपयोग अनेक” ha ha ha..bhai hamare chele jaise dimag mein to itna hi aaya.. plz yadi koi aur shiksha is kahani se milti ho to bataiyega..I’m eager 2 know.. Nidhi ji please upload your new poem…


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