-एक दिए की रौशनी तले- (दीपावली त्यौहार)

दीपावली की रात… एक घर मे…

छोटी-छोटी बेटियाँ, माँ का हाथ बटा रही है,
घर मे रंग-रोगन कर, पकवान बना रही है,

बेटा रात मे जुआ खेलते पकड़ा गया है,
पिता से, जेल के, चक्कर कटवा रहा है,

बहू को, पहली ही दीपावली मे,
दहेज के नाम, पटाखों के हवाले कर दिया है,

दीपावली रौशनी का त्यौहार है,
हम सबने साबित कर दिया….

किसी घर से, मीठे के डब्बे, बासे होने पर, फेंके गये,
कोई, कई रातों बाद, आज भी, भूखा सोया है,

किसी घर बच्चो ने ३,४ जोड़ी कपड़े बदले थे,
किसी के तन मे आज भी, चिथड़े नही थे,

किसी अमीर ने आज, कुत्ते का घर भी सजाया,
किसी ग़रीब की, बरसों से टूटी झोपड़ी मे, आज भी अंधेरा छाया है ,

दीपावली रौशनी का त्यौहार है,
हम सबने साबित कर दिया….

कोई बहुत खुश है की, बेटी टी.वी. मे आ रही है,
तो क्या, अंगप्रदर्शन, गाली- गलौच कर पैसे कमा रही है,

कोई बहुत खुश है की, बेटा विदेश मे नौकरी कर, नाम कमा रहा है,
तो क्या, बरसों से, दीपावली मे रुपये भेज कर, कर्तव्य निभा रहा है,

नाती-पोते दीपावली मे, महँगे उपहार माँगते है,
एक दिन दीपावली मना, बूढ़ो से निजात पाते है,

दीपावली रौशनी का त्यौहार है,
हम सबने साबित कर दिया….

हे लक्ष्मी मैय्या! तू हर बार “निधि” को जीवन के, नये रूप दिखाती है,
एक दिए की रौशनी तले, कितना अंधेरा है, तू समझा जाती है…

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5 टिप्पणियाँ

  1. us andhere ki taraf ishara jo raushni me dabi hai ,sundar prastuti .ek samajik tasvir ubhar aai sachchai lekar .ati sundar .main aapke blog par itni baar aai tippani bhi ki magar aapke blog pe post nahi hota .is baat ka behad afsos hai .

  2. sundar prastuti .ati sundar .

  3. sachmuch adbhut kavita

  4. I’ve no words to say,only that we r forgetting how to celebrate a festival…..Nidhi, very good….I’ll wait for your next poem….

  5. एक दिए की रौशनी तले, कितना अंधेरा है great


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