– कहा करते थे –

1)
“वो”, मुझसे, बेइंतहाँ प्यार करता था,
ऐसा वो और लोग मुझसे कहा करते थे,
मेरे कारण उसके लबों मे हँसी,
और आँखों मे पानी आया करता था,
ये हम भी देखा करते थे…
उसे प्यार से हम, “पागल” कहा करते थे…
2)
हमने कुछ महसूस किया/कुछ नहीं किया,
उसको नाकार कर, बहुत सारी बातें समझाकर,
ये भी मानकर की, हमने उन्हे समझा दिया है,
“बेवफ़ाई” का बोझ भी अपने दिल से हटाकर,
और ये मानकर/मनाकर की,
समय के साथ, “वो पागल”… भी समझ जाएगा,
अपना दिल हल्का कर हम आगे चल दिए…
3)
“उससे”, मैं, बेइंतहाँ प्यार करती हूँ,
ऐसा मैं और मेरे जानने वाले, मुझसे कहा करते है,
उसके कारण मेरे लबों पे हँसी,
और आँखों मे पानी आता-जाता रहता है,
ये वो भी देखा करते है…
प्यार से मुझे, “पगली” कहते है…

वो बेचैनी, वो तड़प, वो दर्द, वो ग़म…
वो आँसू, वो जलन, वो चुभन, वो तपन…

हम भी महसूस करते है, न जीते है/न मरते है…
उस बिन मेरी साँसे,रुक जाएँगी,ये जाना/माना करते है…
4)
उसने कुछ महसूस किया/कुछ नहीं किया,
हमको नाकार कर, बहुत सारी बातें समझाकर,
ये भी मानकर की, उसने हमे समझा दिया है,
“बेवफ़ाई” का बोझ भी अपने दिल से हटाकर,
और ये मानकर/मनाकर की,
समय के साथ, “ये पगली”… भी समझ जाएगी,
अपना दिल हल्का कर वो आगे चल दिए…
5)
“वो” जो मुझसे बेइंतहाँ प्यार करता था,
उसका दर्द, मेरे दिल मे समझ आता है अब…
जब…
“उसने” जिसे मैं प्यार करती हूँ,
मेरे प्यार को नाकारा है अब…

एक ही आवज़ आती है हमेशा…

एक बार मिलूं उससे,
जिसे मैने ठुकराया था…

एक बार उसे भी ठोकर लगे,
जिसे मैने अपनाया है…

जो मुझको महसूस हुआ?
क्या???
वो, उनको भी महसूस होगा?

एक दूजे की…
बेचैनी, तड़प, दर्द, ग़म…
आँसू, जलन, चुभन, तपन…
को समझेंगें?

एक-दूजे से मिलकर, मुस्कुराकर, जीवन की राह मे, आगे चल देंगे?

 

 

 

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मैं अब जीने लगी हूँ…

कुतर दिए है, पंख अपने,
जिनसे उँची उड़ान भारी थी,
नील गगन मे, स्वच्छन्द उड़ चली थी,

तोड़ दिए है, सब सपने,
जिनमे सौ रंग भरे थे,

सपने सजाकर,
पंखों को पाकर,
दूर बहुत-दूर हो गयी थी, अपनो से,

न दुख की पुकार,
मुझ तक आती थी,
क्योंकि…सपनो मे ही खुश थी,

न छोटी-छोटी खुशियों मे,
अपनो संग हो पति थी,
क्योंकि…दूर उड़ चली थी,

रंगीन सपनो और उँची उड़ान के,
बोझ के तले, दबने-घुटने लगी थी,

अब…

वापस धरती मे चलने लगी हूँ,
सपनों से बाहर, सच की दुनियाँ मे जीने लगी हूँ,

अपनो के करीब आ गयी हूँ,
सुख मे सुखी और दुख मे दुखी होने लगी हूँ,

क्योंकि…

मैं अब जीने लगी हूँ…