रूठों यूँ ना हमसे

रूठों यूँ ना हमसे,
ना जी पाएँगे
हँस के…

सज़ा यूँ ना दो हमे,
आँसू भी ना गिरे
पलक से…

राह देखते है तुम्हारी,
कुछ इस तरह 
हम कब से…

आँसू जो आए पालक पे,
तो धुंधला जाओगे हमसे

जो झपकेंगी पलकें,
ना चल दो तुम
पलट के…

शिकवा हो जो तुमको,
कह भी दो
अब हमसे…

चुप रह कर और छुपकर,
यूँ ना जीने दो हमे
तड़प के…

जाने हो जो दिल की,
हर एक बात
माफ़ भी कर दो हमे…

 

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Published in: on जून 4, 2009 at 6:08 अपराह्न  टिप्पणी बन्द रूठों यूँ ना हमसे में  
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