For Me-You…

The grace of god is you

The treasure of my life is you

The best thing about me is you

I am blessed and gifted with you

I am the luckiest person in the world just because of you…

                                                  *********

If  there is word exist like

Hope

Faith

Trust

Believe

Love

For me just because of you…

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कृपया अपने जूते बाहर उतरे !

                                                          कृपया आपने जूते बाहर उतरे !


ये बात हम कब से समझते और समझाते आए है की,  “कृपयाअपने जूते बाहर उतारे “!
पर इतनी सीधी सी बात ना हम किसी को समझा पाए और ना ही कोई समझ पाया!
शायद समझ  का फेर हो गया?  चाहे स्वच्छता की बात हो या सुंदरता की या फिर
 घर की सजावट की, जूते केवल पैरों मे ही सुंदर  और शालीन लगते है!
कितने ही कीमती हो या सस्ते पैरों की शोभा पैरों मे ही भाती है, कही और नही!
 ना ही हम इन्हे हाथों मे पहन सकते है ना ही सिर का ताज बना सकते है!
 
पैरों  से  उतरे और बस महाभारत मचा देते है!  सुधरे को बिगाड़ना हो या बिगड़े को सुधारना हो
या होश ठिकाने लगाना हो, पैरों की ये शोभा अच्छे अच्छों की शोभा मे चार चाँद लगा देती है!
इनकी महिमा मंडित करने की आवश्यकता नही है, ये वो हथियार है जो बिना आवाज़ के चलता
है और इसका निशाना सही जगह लगे या ना लगे इसके वार की आवाज़ चारों तरफ गूँजती है और
घाव सालों तक हरा रहता है! हर दर्द का मलहम और ज्खम का इलाज कहा जाने वाला  समय तक,
इस घाव को नही भर सकता कभी सुना करते थे की यहाँ बातों के जूते चले, वहाँ बातों के जूते चले !
बातों बातों मे ही जूते मारने की बात से ही, सभी के होश उड़ जाते थे! अब तो वो समय आ गया है,
जब लोग भारी सभा मे भी जूता मारने का कोई भी मौका  नही छोड़ते है, इसे सबसे अच्छा ज़रिया मानते है
अपनी बात रखने का ! जितनी बड़ी महफ़िल उतना तगड़ा जूता ! जितना बड़ा आदमी जूता खाए, उतना
बड़ा नाम जूता मारने वाले का नाम और शोहरत भी ! शोहरत पाने की चाह मे अब ये एक आसान रास्ता
बन गया है !

 महफिलें लगाने वाले और ख़तरों से खेलने वाले  अब थोड़ा सतर्क हो जाएँ, वो लोग भी जिन्होने
जिंदगी भर  बातों के जूते चलाएँ है, वो दिन अब दूर नही,जब किसी दिन आपसे चिड़ा हुआ कोई
आम या खास आदमी आपकी तरफ के जुटा फेंक दे ! अपनी इज़्ज़त अगर बचा कर रखनी है,
तो पुरानी बातों पर ध्यान दे और खुद भी अपना जूता बाहर रखे और दूसरों से भी उनका
जूता बाहर रखने को कहें ! अब, लगता है सब ये बात आसानी से समझ  पाएँगे!