हर शब्द कहने के पहले , बहुत बार सोचा…

हर शब्द कहने के पहले , बहुत बार सोचा…
हर कदम उठाने के पहले , बहुत बार रोका…

हर धड़कन सुनाने के पहले , बहुत बार सोचा…
हर सपना सजाने के पहले , बहुत बार तोड़ा…

हर रंग भरने के पहले , बहुत बार बेरंग किया…
हर सांस लेने के पहले , बहुत बार दम को रोका…

हर पल जीने के लिए , बहुत पल को खोया…
हर हँसी दिखानेके पहले , बहुत बार रोया…

हर मदहोशी दिखाने के पहले , बहुत बार होश खोया…
हर चैन पाने के पहले , बहुत बार बैचेनी को पाया…
 
हर अरमान जगाने के पहले , बहुत बार अरमान छोड़े…
हर तरफ तुमको पाने के पहले , बहुत बार खुद को खोया…

हर शब्द कहने के पहले , बहुत बार सोचा…
हर कदम उठाने के पहले , बहुत बार रोका…

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वो शब्दों की बात करता है…

वो कहता है, तुम अपना प्यार शब्दों में बयां करती हो कैसे ?

वो शब्दों की बात करता है …

जो दिल में धड़कता है , सांसों में बसता है ,
जी रही हूँ , बस उसका नाम लेकर ,
मरना भी है , बस उसका नाम लेकर ,

जो आँचल मे समा जाए , वो प्यार तो कम है ,
जो शब्दों मे आ जाए वो , वो प्यार भी कम है ,

 वो शब्दों की  बात करता है…
जो दिल में धड़कता है , सांसों में बसता है ,

मारना नही, जीना सिखाया है…

 

तुमसे जो जाना है , हमने वो माना है….

तुम वो हो जिसने सुनना नही, समझना सिखाया है…
तुम वो हो जिसने देखना नही, महसूस करना सिखाया है…

तुम वो हो जिसने डरना नही, लड़ना सिखाया है…
तुम वो हो जिसने खोना नही ,पाना सिखाया है…

तुम वो हो  जिसने  हारना नही , जीतना सिखाया है…
तुम वो हो जिसने भूलना नही, याद रखना सिखाया है…

तुम वो हो जिसने रोते को , हॅसना सिखाया है…
तुम वो हो जिसने भटके को , रास्ता दिखाया है…

तुमसे जो जाना है , हमने वो  माना है….

तुम वो हो जिसने भवँर मे डूबना नही, तैरना सिखाया है…
तुम वो हो जिसने खुद को मिटाना नही , पाना सिखाया है…

तुम वो हो जिसने धूप मे भी , तपन को सहना सिखाया है…
तुम वो हो जिसने काँटों मे भी , चलना सिखाया है…

तुम वो हो जिसने अंधेरों को भी, रौशन करना सिखाया है…
तुम वो हो जिसने तूफ़ानो को भी, बेबस करना सिखाया  है…

तुम वो हो जिसने बुझती लौ को भी, जलना सिखाया है…
तुम वो हो जिसने मारना नही, जीना सिखाया है…

तुमसे जो जाना है , हमने वो माना है….