तपती धूप मे , दुख के तूफ़ानों मे
ग़म की परछाईयों मे , अंधेरी रातों मे
भटकी हुई राहों मे , अनजानी मन्ज़िल मे
तन्हाई की शामों मे , अकेली रातों मे
सुख मे ना सही , दुख मे मुझे हमेशा अपने पास पाओगे…
तपती धूप मे , दुख के तूफ़ानों मे
ग़म की परछाईयों मे , अंधेरी रातों मे
भटकी हुई राहों मे , अनजानी मन्ज़िल मे
तन्हाई की शामों मे , अकेली रातों मे
सुख मे ना सही , दुख मे मुझे हमेशा अपने पास पाओगे…
kitne kam shabdo me aapne kitna sundar varnan kiya hai aapki upmaye gajab ki hai……..
you too are an awesome writer….
i liked it so much…..thanks….
keep writing n sharing…..