मेरी आँखों के आँसू आज थमते नही है
ये सिसकियाँ मेरी रुकती नही है
ना जाने क्या बात हुई आज की
हम जीते नही मरने लगे है
भोर होते ही यूँ लग रहा था
आज कुछ कमी सी है
दर्द था जो दिल मे कहीं छुपा हुआ
आज उभर कर आ ही गया
ना जाने आज ये क्यों हुआ
पर आज कुछ गॅमी सी है
भूल गयी थी जिन बातों को
समय संग आगे चल पड़ी थी
वो समय आज फिर रुक गया
मैने जो तिथि आज देख ली
हृदय वेदना से भर गया
जो दर्द तन मे हो रहा था
वो मन के घावों की याद दे गया
भूल गयी थी आज की तिथि
जो मुझे “माँ” नाम दे सकती थी
गुज़र गये यूँ महीने नौ
जो तुम होते तो,
मेरे आँचल मे भी एक तस्वीर उभर सकती थी
जो ना याद रखे कोई तुम्हे
मेरा दिल तुम्हे याद करता है
मुझे जो छोड़ गये हो अधूरा
एक बार फिर से आ जाओ
तुमसे वादा करती हूँ
तुम्हारा पूरा ध्यान रखूँगी
इस बार कोई ना ग़लती करूँगी
मिट भी जाऊ, तो भी तुम्हे लाकर रहूंगी
वो दर्द जो मैं न सहा, वो ख़ुशी जो मुझे न मिली
आकर वो मुझे दे जाओ
मेरी सुनी गोद पड़ी है
राह तुम्हारी देख रही है
मेरी वेदना को सुन जाओ
मैं अधूरी हूँ ,पूरी कर जाओ
एक बार तुम आ जाओ…