सोना और शुतुरमुर्ग बनना… ये क्या बात हुई भला?आप भी यही सोच रहे होंगे की आख़िर ये दोनो मे क्या बात है?बात तो बहुत पाते की है जी, बस नज़ारिए का फेर है!वो ऐसे की, जब हम स्कूल मे पड़ने जाते तो हमारी एक शिक्षिका हुआ करती थी, जो हम बच्चो से मुहावरों मे बाते करती थी! जैसे, तुमलोग बिना मार खाए सुधरोगे नही को वो कहती, “मार खाए धम-धम,विद्या आए छम-छम” जब बच्चे शोर मचाते और उन्हे आता देखा कर चुप हो जाते,तब वो कहती“शुतुरमुर्ग क्यों बने हो“, जब मुझे क्लास के बाहर हल्ला सुनाई दे रहा है, तो अब मूह छुपाने से क्या? अब शुतुरमुर्ग की तरह क्यों बन गये हो! तब हम बच्चो को वो समझती भी की, शुतुरमुर्ग बहुत डरपोक किस्म का प्राणी होता है,जब वो कोई परेशानी देखता है, याने जब कोई प्राडी उसको खाने आता है तो, वो अपना मूह छुपा लेता है, भले ही पूरा शरीर दिखता रहे,वो सोचता है की उसे तो कुछ नही दिखा रहा, तो उसके शत्रु को भी वो नही दिखा रहा होगा, जबकि उसका पूरा बड़ा शरीर दूर से ही दिखता है!जब हम ग्रहकार्या नही करते तो वो कहती,”आराम बड़ी चीज़ है मूह ढक के सोईए,किस-किस को याद कीजे किस- किस पे रोईए“याने तुमलोग तो बाड़िया चादर तान के सो रहेहोगे, सोचा होगा सो जाओ, जब ग्रहकार्या करना ही नही है तो, कौन जागकर समय बेकार करे, कौन जागकर उसकी याद करे,चिंता करे,मस्त सो जाओ!कल की कल देखेंगे!
बचपन की ये बाते आब याद आती है, जब माबाप की बात ना सुननी हो, जब बीबी की किलकिल नही सुननी हो, बचे का होमवर्क ना करवाना हो, बिज़ली का बिल नही जमा करना हो, बॅंक ना जाना हो या जब भी कोई कम नही करना हो! या तो चादर तान कर सो जाओ, देखते है कों कब तक चिल्लाता रहेगा? एक-दो घंटे मे तो थककर चुप होजएगा! कौन कब तक अपनी रह देखेगा किसी कम के लिए जिसकी अटकी होगी वो अपना कम खुद कर लेगा! याने जब लगे की स्थिति विकट हो रही है तो, शुतुरमुर्ग बन कर अपना मूह छुपा लो, जिसको शरीर दिखता है दिखता रहे?अपना क्या जाता है? अपने पास तो सीधा सा उत्तर है, अरे मैं भूल गया या सो गया भाई! बस जिसे सिर पीटना है पीटता रहे! अपना तो आराम भी हो गया और काम भी दूसरे आदमी ने कर दिया और क्या चाहिए? जीवन मे सुकून और आराम!जिसका खून जलता है.जाता रहे! हमारी तो तन्द्रुस्ति बरकरार ही रही! अब तो सोने का रिकार्ड बनाने की भी प्राक्टिज़ भी बहुत हो गयी है!समारे आराम मे कोई कितना भी खलल डाले हम जगाने वालों मे से नही है! मा-बाप चिल्लाए,बीबी खीजे, बच्चे रोए हमे क्या? ज़्यादा से ज़्यादा उठ कर यही कहना है अरे, मैं तो ये कम करने ई वाला था, आपने कर दिया?कोई बात नही अगली बार कर दूँगा! कौन है ऐसा, जो हमे पिछले कुछ ही दीनो से जनता हो और हमे कोई कम बता दे? जिसने बताया उसका कम ऐसे किया की, वो दूबारा नही मिला! अच्छे-अच्छों के काम हमने ऐसे बनाए है की बस! सोन का एक और बहुत बड़ा फ़ायदा होता है, ना किसी का कम करना होता है, ना वो हमसे गड़बड़ होता है! ना किसी को सलाह देनी होती है, ना वो सलाह गड़बड़ होती है! दोनो ही स्थिति मे अपना ही फ़ायदा, लोग कहते है सीधा आदमी है, किसी के मामले मे टाँग नही डालता!
मा-बाप,बीबी -बच्चों का क्या? इन्हे तो ऐसे ही जिंदगी गुजारनी है! वैसे यही लोग है जो मेरी नीद पर नज़र लगाए है!जब मैं अंगड़ाई लेकर उठता हूँ, तो मेरी बीवी की बर नज़र मुझ पर यू पड़ती है मानो, मैं पिछले कई सालों से सो ही रहा हूँ!वो दो नज़रें मुझे यूँ देखती है मानो मैने कोई बड़ा पाप किया है!इससे बचाने के लिए मैं दोबारा आँखे बंद करके सो जाता हूँ! एक बार फिर से सोने की कला भगवान ने कुछ ही लोगों को दी है!मैं वो खुशकिस्मत हूँ!जो लगातार कईघंटे सो सकता हूँ!इन्ही लोगो को मेरे आराम से परेशानी है, वैसे जगाने पर मैं इन्हे भावनात्मक रूप से डरता हूँ,ये करेंगे भी क्या डर भी जाते है!
आज के समय मे बचपन के ये दोनो मुहावरे ही हमारे सुखी जीवन का आधार बने हुए है!चाहे तो आप भी आज़मा कर देखिए दुनिया के सारे दुखों औपरेशानियों से आपको छुटकारा मिल जाएगा!






